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विजऩ एवं लीडरशिप एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया

12/03/2017

डबवाली डा. प्रेम चंद सचदेवा मैमोरियल आदर्श शिक्षा समिति के संस्थापक प्रधान स्वर्गीय लोक नाथ सचदेवा की प्रथम पुण्यतिथि पर हरियाणा पब्लिक स्कूल व एचपीएस सीनियर सैकण्डरी स्कूल के निदेशक व प्रधानाचार्य आचार्य रमेश सचदेवा एवं स्टाफ सदस्यों द्वारा उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए। 

इस उपलक्ष्य में लोकनाथ जी के सपनों को सकारात्मक रूप से लागू करने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान डालने के लिए उनके द्वारा लिए गए संकल्प को पूरा करने के लिए विद्यालय प्रबंधक समिति की ओर से अध्यापकों के विकास के लिए विजऩ एवं लीडरशिप एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

विद्यालय निदेशक एवं प्रिंसीपल आचार्य रमेश सचदेवा ने लीडरशिप स्किल के बारे बताया कि एक सफल लीडर अपने जीवन में क्या करता है उसके जीवन की शैली कैसी होती है वो क्या करता है और क्या नहीं करता है व उसमें क्या-क्या  क्वालिटि होती है इन सब बातों पर विभिन्न क्रियात्मक गतिविधियों के द्वारा जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कैसे एक अच्छा लीडर ही एक अच्छा अध्यापक हो सकता है। एक अच्छा लीडर कैसे बना जा सकता है? एक अच्छा लीडर बनने के लिये क्या-क्या स्किल होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि सबसे पहले आदमी को अपने दिमाग को एक लीडर के दिमाग की तरह बनाना होता है फिर उसके बाद अपने तौर तरीकों को बदलना होता है, आप कैसे बदलेंगे अपने तौर-तरीकों को जिनसे आप एक बढिय़ा लीडर बन पायेंगे ऐसे कुछ पवाइंट बताते हुए उन्होंने कहा एलटीडी ही सभी का मूल मंत्र है। एल लर्निंग, टी ट्रेनिंग व डी का अभिप्राय है डुप्लीकेट अर्थात् सीखना, सीखाना व अपने जैसे लोग बनाना।

एक कुशल और सफल शिक्षक बनने के लिये भी ये टिप्स काम आयेंगे। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कमीज़ का यदि पहला बटन सही बंद हो जाए तो बाकि के बटन स्वत: ही ठीक बंद हो जाते हैं इसी प्रकार स्कूली शिक्षा यदि शिक्षक द्वारा सही प्रदान की दी जाती है और उसका ठीक-ठीक मूल्यांकन कर लिया जाता है तो निश्चित ही ऐसे राष्ट्रनिर्माता की राष्ट्र निर्माण में उचित आहूति होती है।

सीखाना जोकि शिक्षक का मुख्य कार्य है जोकि आजकल गौण हो गया है। सीखाने वाले को मुख्य चार बातें ध्यान रखनी चाहिए। पहले तो वह बेसिक सिखाए, उसके बाद उसका अभ्यास करवाए फिर समस्या हल करने को दे और जरूरत पडऩे पर उसकी हल करने में मदद भी करे और अंत में नोट्स तैयार करवाए जिसके लिए विद्यार्थी को किसी गाइड़ अथवा ट्यूश्न की जरूरत ना पड़े। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार केवल टीवी पर मैच देख लेने से कोई अच्छा खिलाड़ी नहीं बन जाता और केवल ग्रंथ पढ़ लेने से कोई विद्वान नहीं हो जाता इसके लिए अभ्यास जरूरी है और अभ्यास भी श्रृंख्लाबद्ध होना चाहिए। एक से दो और दो से चार। 

अपने जैसे लोग बनाना अर्थात् डूप्लीकेट तैयार करना जरूरी है। कट-कॉपी-पेस्ट की प्रक्रिया से नहीं अपितु परस्पर सहयोग व संवाद से। ऐसा करने से कार्य करने की स्पीड़ भी बढ़ती है और परिणाम भी अच्छे आते हैं। ऐसी विभिन्न क्रियाओं के माध्यम से एक अच्छा शिक्षक व लीडर बनने के लिए ग्रुप एक्टिविटि बहुत जरूरी है। 

अंग्रेजी के लैक्चरार बिस्वास नायिक ने भी अपने विद्यार प्रस्तुत करते हुए कहा कि हर मनुष्य में मार्गदर्शक बनने की क्षमता होती है जरूरत सिर्फ स्वयं से परिचित होने की है और जीवन के मुख्य उद्देश्य को जानने की। कैमिस्ट्री के लैक्चरार महिन्द्र कुमार ने कहा नेतृत्व की शुरूआत समाज के कल्याण के उद्देश्य से होती है और समाज कल्याण के लिए हर एक का आपस में ऐसा सम्बंध होना चाहिए जैसे एक मकान में हर ईंट आपस में जूड़ी होती है।

इस अवसर पर विज्ञान अध्यापिका कोमल सेठी, फिजिक्स लैक्चरार पूजा सेठी, अंग्रेजी की अध्यापिका मनविन्द्र कौर, गणित अध्यापिका कुलतरण कौर, अर्थशास्त्र के लैक्चरार मनजीत सिंह व एकाऊण्टस की प्रवक्ता रीतू मितल ने भी अपने विचार रखे। सभी अध्यापक-अध्यापिकाओं ने कहा कि वर्तमान स्मार्ट क्लासरूम के युग में टीचरों का स्मार्ट होना भी जरूरी है और उसके लिए ऐसी कार्यशालाओं का नियमित आयोजन होना जरूरी है।


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