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BASANT PANCHMI CELEBRATION

जिस प्रकार मनुष्य जीवन में यौवन आता है उसी प्रकार बसंत इस प्रकृति का यौवन है। 'बसंत ऋतु' को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। जाती हुई सर्दियां, बड़े होते दिन, गुनगुनी धूप धीरे-धीरे तेज होती हुई, काव्य प्रेमियों को हमेशा आकर्षित करती रही है। ये शब्द एचपीएस सीनियर सेकंडरी स्कूल में नटखट संस्था द्वारा आयोजित बसंत के कार्यक्र्म उडी-उडी रे पतंग मेरी उडी रे के अवसर पर बोलते हुए शिक्षा निदेशिका सुजाता सचदेवा ने कहे| हिन्दी की प्रवक्ता छिंदर पाल कौर ने कहा की बसंत ऋतु सदैव ही कवियों की प्रिय ऋतु रही है। इस समय तक सूखे पत्ते झड़ जाते हैं और नए पत्ते आने लगते हैं। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल ही फूल दिखाई देते हैं। खेतों में नई फसलें पक जाती हैं। सरसों, राई और गेहूँ के खेत मन को लुभाने लगते हैं, जिन्हें देखकर किसान गदगद होता है। पंजाबी की प्रवकता नवनीत कौर जाती हुई सर्दियां, बड़े होते दिन, गुनगुनी धूप धीरे-धीरे तेज होती हुई, काव्य प्रेमियों को हमेशा आकर्षित करती रही हैं।